Kapurthalaसियासत में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति की जुबान पर अब किसान ही चर्चा में

सियासत में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति की जुबान पर अब किसान ही चर्चा में

Date:

पंजाब में 18 लाख किसान परिवार, 54 लाख मतदाता, किसान भाग्य विधाता

कपूरथला/चंद्रशेखर कालिया: इस बार के चुनाव में किसान भाग्य विधाता की भूमिका में हैं, क्योंकि किसान यूनियन खुद भी चुनावी मैदान में उतर रही हैं। मालवा के 8, दोआबा के 3 और माझा के 2 जिलों में इनका सीधा प्रभाव है। वहीं, किसान संयुक्त समाज मोर्चा ने उम्मीदवार घोषित भी कर दिए हैं और गुरनाम सिंह चढ़ूनी के साथ चुनाव लडऩे की समहमित भी बन चुकी है। बहरहाल, सियासत में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति की जुबान पर अब किसान ही चर्चा में हैं, क्योंकि पंजाब में 18 लाख किसान परिवार हैं। इनमें करीब 54 लाख मतदाता किसी भी पार्टी का नफा-नुकसान बिगाड़ सकते हैं।

किसान पहले भी चुनावों में मतदाता रहे हैं परंतु इस बार और खास बन गए हैं। हालांकि यह भी सच है कि राज्य के 18 लाख किसान परिवारों में 2 से 2.5 लाख किसी न किसी तरह पार्टियों से जुड़े हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी की ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ और भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व में पंजाब के 22 किसान संगठनों की पार्टी ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इधर, संयुक्त समाज मोरचा के सीएम चेहरा माने जाने वाले बलबीर सिंह राजेवाल समराला से चुनाव मैदान में उतरे हैं।कृषि कानूनों पर किसान भाजपा के विरोध में थे। यदि ये दूसरी पार्टियों को वोट देते तो भाजपा को सीधा नुकसान होता। अब वोट बंट सकता है।

पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का किसानों में ठीक प्रभाव है। उम्मीद यही थी कि कैप्टन के साथ यह वोट डायवर्ट हो सकता है, लेकिन इसकी संभावना कम है। शिअद ने किसान आंदोलन को पूरा समर्थन दिया। उसे उम्मीद थी कि चुनाव में इनका सहयोग मिलेगा, लेकिन यूनियन के आने से उसके लिए झटके जैसा है।मालवा को छोड़ दूसरे जिलों में आप का थोड़ा कम प्रभाव है। यूनियन के प्रतिनिधियों के चुनाव मैदान में आने से किसानों के वोट बंट सकते हैं।

पार्टी को पूरी उम्मीद थी कि किसान उसे वोट देंगे। दिल्ली के सीएम केजरीवाल भी मान चुके हैं कि किसानों के चुनाव लडऩे से उनकी पार्टी को नुकसान हो सकता है। किसान के आप के साथ जाने की चर्चा थी। परंतु किसान यूनियनों के चुनाव मैदान में आने से यह वोट आप को जाने के कम आसार हैं। पार्टी का मालवा में अच्छा प्रभाव है। यहीं से पिछली बार 69 में 40 सीटें जीती। किसान यूनियन का इसी क्षेत्र में प्रभाव है। परंपरागत वोट बंट सकता है।

मालवा: 8 जिलों की 32 सीटों में 18 पर सीधा प्रभाव। 54 लाख के करीब हैं किसान और किसानी से जुड़े मतदाता। 2-2.5 लाख किसान परिवार जुड़े हैं पार्टियों से। 10 प्रतिशत किसान दूसरे के कहने पर किसी को दे देते हैं वोट, इनमें ज्यादा उम्रदराज हैं।प्रदेश के 13 जिलों की 57 सीटों पर प्रभाव है। इनमें से 18 सीटों पर किसानों का सीधा प्रभाव है। माझा: 2 जिलों की 11 सीटों 10 पर सीधा प्रभाव। दोआबा: 3 जिलों की 14 सीटों में 8 पर सीधा प्रभाव। सीधे तौर पर किसी पार्टी के हाथ में ज्यादा कुछ नहीं। क्योंकि, इस बार खुद भी चुनाव मैदान में, मालवा के 8, दोआबा के 3 और माझा के 2 जिलों में सीधा प्रभाव।

अगर आप हमारे साथ कोई खबर साँझा करना चाहते हैं तो इस +91-95011-99782 नंबर पर संपर्क करें और हमारे सोशल मीडिया को फॉलो करने के नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें,

Follow us on social media:

Popular

More like this
Related

Marriage Palace में लगी आग, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची मौके पर

टोहाना : गर्मी बढ़ने के साथ-साथ आग लगने की घटनाएं...

बंद हुआ गूगल का GPay App, Play Store से भी हटा

नई दिल्ली: गूगल के पॉपुलर डिजिटल वॉलेट प्लेटफॉर्म जीपे...

AI की दुनिया में iPhone की एंट्री से Apple Intelligence के फीचर्स उड़ा देंगे होश

नई दिल्लीः Apple WWDC 2024 इवेंट में कंपनी ने iOS...

23 june को Zaheer Iqbal से शादी करेंगी Sonakshi Sinha

मुंबई: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा...

PM Modi की शपथ से पहले PM House पर लगा नेताओं का तांता, देखें वीडियो

नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी रविवार शाम 7.15 बजे देश...

घर से निकलने से पहले यह खबर जरुर पढ़ें,

बंद रहेगी कई सड़कें और बसें  नई दिल्ली : रविवार को...

Plane Crash होने से Apollo-8 मिशन के मशहूर अंतरिक्ष यात्री की मौत, देखें वीडियो

उगती पृथ्वी की खींची थी ऐतिहासिक तस्वीर वाशिंगटन: चंद्रमा की...