NationalPM Modi के चुनावी भाषण को लेकर Manmohan Singh का आया बयान

PM Modi के चुनावी भाषण को लेकर Manmohan Singh का आया बयान

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नई दिल्लीः भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने लोकसभा चुनाव-2024 के आखिरी चरण में होने वाली पंजाब में वोटिंग से पहले पंजाब के वोटरों के नाम लेटर लिखा। इसमें उन्होंने पंजाब के लोगों से भाजपा सरकार न बनाने की अपील की। वहीं, उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को हो रहे नुकसान को लेकर अपनी राय दी। तीन पेज के लेटर में मनमोहन सिंह ने किसान आंदोलन समेत बड़ी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पंजाब, पंजाबियों और पंजाबियत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दिल्ली की सीमाओं पर 750 किसान इंतजार करते हुए शहीद हो गए। इनमें ज्यादातर (करीब 500) पंजाब के किसान थे।

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पीएम मोदी ने चुनाव के दौरान नफरत भरे भाषण दिए। वह पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पद की गरिमा कम की है। कुछ गलत बयानों के लिए उन्होंने मुझे भी जिम्मेदार ठहराया। मैंने अपने जीवन में कभी भी एक समुदाय को दूसरे समुदाय से अलग नहीं किया। ऐसा करने का कॉपीराइट सिर्फ भाजपा के पास है। मेरे प्यारे देशवासियों, भारत एक अहम मोड़ पर खड़ा है। मतदान के अंतिम चरण में, हमारे पास यह सुनिश्चित करने का एक अंतिम मौका है कि लोकतंत्र और हमारे संविधान को भारत में तानाशाही कायम करने की कोशिश कर रहे निरंकुश शासन के बार-बार होने वाले हमलों से बचाया जाए।

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पंजाब और पंजाबी योद्धा हैं। हम बलिदान की भावना के लिए जाने जाते हैं। समावेशिता, सद्भाव, सौहार्द और भाईचारे के लोकतांत्रिक लोकाचार में हमारा अदम्य साहस और सहज विश्वास हमारे महान राष्ट्र की रक्षा कर सकता है। पिछले 10 सालों में भाजपा सरकार ने पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 750 किसान, जिनमें से ज्यादातर पंजाब से थे, दिल्ली की सीमाओं पर महीनों तक इंतजार करते हुए शहीद हो गए। जैसे कि लाठियां और रबर की गोलियां पर्याप्त नहीं थीं। प्रधानमंत्री ने संसद की दहलीज पर हमारे किसानों को आंदोलनजीवी और परजीवी कहकर मौखिक रूप से हमला किया। उनकी एकमात्र मांग उनसे परामर्श किए बिना उन पर थोपे गए 3 कृषि कानूनों को वापस लेने की थी।

मोदी जी ने 2022 तक हमारे किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। पिछले 10 वर्षों में उनकी नीतियों ने हमारे किसानों की कमाई को खत्म कर दिया। किसानों की राष्ट्रीय औसत मासिक आय मात्र रु. 27 रुपए प्रतिदिन, जबकि प्रति किसान औसत कर्ज 27 हजार रुपए (एनएसएसओ) है। ईंधन और उर्वरक सहित इनपुट की उच्च लागत, कम से कम 35 कृषि संबंधी उपकरणों पर जीएसटी और कृषि निर्यात व आयात में मनमाने निर्णय ने हमारे कृषक परिवारों की बचत को नष्ट कर दिया है और उन्हें हमारे समाज के हाशिये पर छोड़ दिया है।

कांग्रेस-यूपीए सरकार ने 3.73 करोड़ किसानों को 72,000 करोड़ की ऋण माफी प्रदान की, एमएसपी में वृद्धि की, इसके दायरे को बढ़ाया, निर्यात को प्रोत्साहित करते हुए उत्पादन में वृद्धि की। इन सबका परिणाम यह हुआ कि हमारे कार्यकाल में पिछले 10 वर्षों की तुलना में कृषि में दोगुनी वृद्धि हुई।

अब कांग्रेस पार्टी ने हमारे घोषणापत्र में किसान न्याय के तहत 5 गारंटी दी हैं। इनमें शामिल हैं- एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि के लिए एक स्थिर निर्यात-आयात नीति, ऋण माफी के लिए कृषि वित्त पर एक स्थायी आयोग, फसल के नुकसान के मामले में किसानों को 30 दिनों में बीमित मुआवजे का सीधा हस्तांतरण और जीएसटी को हटाना। कृषि इनपुट उत्पाद और उपकरण। मेरी राय में ये कदम कृषि सुधारों की दूसरी पीढ़ी के लिए माहौल प्रदान करेंगे।

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